डोनाल्ड ट्रंप का ‘पावर प्ले’: टैरिफ़ की आग में झुलस रहा अमेरिका? जानिए आप तक कैसे पहुँच सकता है इसका असर!

नमस्ते दोस्तों!
आज मैं आपको एक ऐसे झमेले के बारे में बताने वाला हूँ, जिसने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। और मज़े की बात — इसका असर सीधे-सीधे आप और मेरी जेब तक पहुँच सकता है! जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और फिर से राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल डोनाल्ड ट्रंप और उनके टैरिफ़ गेम की।

अब ये टैरिफ़ क्या बला है? सीधी भाषा में बोले तो ये वो टैक्स है, जो अमेरिका बाहर से आने वाले सामान पर लगाता है। ट्रंप जब पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब उनका फेवरेट डायलॉग था — “अमेरिका फर्स्ट!” और इसे सच करने के लिए उन्होंने विदेशी सामान पर टैरिफ़ बढ़ाना शुरू कर दिया। मतलब चाइना, कनाडा, मैक्सिको — किसी को नहीं छोड़ा।

उनका प्लान था कि बाहर से सस्ता सामान आना बंद होगा, तो लोग अमेरिकी सामान खरीदेंगे — अमेरिकी कंपनियाँ मज़बूत होंगी और लोगों को नौकरी मिलेगी। आइडिया बुरा नहीं था, पर ज़मीन पर इसका असर उल्टा पड़ता दिख रहा है!

टैरिफ़ की वापसी से हड़कंप!

अभी कुछ दिन पहले की बात है — ट्रंप साहब ने कनाडा जैसे पुराने दोस्त देश पर भी 35% का भारी-भरकम टैरिफ़ ठोक दिया। अब आप सोचिए, कनाडा से अमेरिका में आने वाला सामान महंगा होगा, तो इसका झटका सबसे पहले किसे लगेगा? वहीं के लोगों को! महंगाई बढ़ेगी, रोज़मर्रा की चीज़ें महंगी होंगी — तो आम जनता की जेब ढीली होगी ही होगी।

इससे शेयर बाज़ार भी काँप उठे। पहले भी जब-जब ट्रंप ने टैरिफ़ की धमकी दी, मार्केट धड़ाम हुआ। फिर उन्होंने थोड़े दिन के लिए इसे रोक दिया तो मार्केट ने चैन की साँस ली। लेकिन जैसे ही टैरिफ़ की चर्चा लौटती है, मार्केट फिर से डर से गोता लगाने लगता है।

अमेरिका की GDP और महंगाई — दोनों को चोट!

अब ज़रा सोचिए — अमेरिका की जीडीपी यानी पूरी कमाई पर भी इसका असर पड़ रहा है। हुआ क्या? जब कंपनियों को लगता है कि टैरिफ़ लगने वाला है, तो वो पहले ही ज़्यादा माल इम्पोर्ट कर लेती हैं — ताकि बाद में टैक्स न देना पड़े। इसका नाम है ‘फ्रंट लोडिंग’। इसका फायदा दिखता तो है, पर असली इकॉनमी में कोई दम नहीं रहता। नतीजा? आँकड़े तो अच्छे दिखते हैं, असल में हालत ख़राब रहती है।

इधर महंगाई भी तंग कर रही है। फेडरल रिजर्व — मतलब अमेरिका का RBI — बहुत मेहनत से महंगाई को कंट्रोल में लाया था। अब ब्याज़ दरें कम होनी चाहिए थीं, पर टैरिफ़ की वजह से फिर डर है कि सामान महंगा होगा, महंगाई फिर उछलेगी — तो ब्याज दरें घट नहीं पा रहीं।

कंपनियाँ भी परेशान — कोई प्लानिंग नहीं कर पा रहीं!

सोचिए, अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियाँ जैसे माइक्रोसॉफ्ट, एसेंशियर — सबने रिपोर्ट्स में बोल दिया कि भाई, हमें नहीं पता अगले साल क्या होगा! क्योंकि ट्रंप कभी भी कोई नया टैरिफ़ ठोक सकते हैं। बिज़नेस में इतनी अनिश्चितता हो तो कौन सा मालिक चैन से सो पाएगा?

भरोसे का संकट — दुनिया अमेरिका से कटने लगी!

सबसे खतरनाक बात ये है कि धीरे-धीरे दुनिया का भरोसा अमेरिका से उठ रहा है। लोग अब बैकअप ऑप्शन देखने लगे हैं। मतलब बिज़नेस तो अमेरिका से करेंगे, लेकिन साथ में कोई और रास्ता भी तैयार रखेंगे — कि कहीं ट्रंप फिर पलटी मार दें, तो नुकसान कम से कम हो।

यूक्रेन वाला किस्सा सबके सामने है — अमेरिका ने भरोसा दिलाया था, फिर कितना साथ निभाया वो आप देख ही रहे हैं। अब कोई भी देश आँख मूँद कर भरोसा नहीं कर रहा।

डॉलर भी दबाव में — वॉरेन बफे की कड़ी चेतावनी!

अब रही बात डॉलर की — ट्रंप बोलते हैं “डॉलर इज़ ग्रेट!” पर उनकी टैरिफ़ पॉलिसी ने डॉलर की भी हालत पतली कर दी है। डॉलर इंडेक्स 100 से नीचे खिसक चुका है — और यही चलता रहा तो अमेरिका को ही भारी पड़ेगा।

दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वॉरेन बफे भी खुलकर बोल चुके हैं कि डॉलर ‘नरक की राह पर चल पड़ा है।’ अब बफे जैसा शख्स यूँ ही कुछ नहीं बोलता — वो भी इशारा कर रहा है कि ट्रंप को ये टैरिफ़ की नौटंकी बंद करनी चाहिए।

मंदी का खतरा — आप तक कैसे पहुंचेगा?

अब असली डर की बात सुनिए — अगर अमेरिका मंदी में जाता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर आएगा। क्यों? क्योंकि अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार है। वहां माँग कम होगी, तो दूसरे देशों से चीज़ें कम मँगवाएँगे। कंपनियाँ घाटे में जाएँगी — नौकरी कटेगी — और फिर ग्लोबल इकोनॉमी स्लो हो जाएगी।

इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी आता है। हमारा शेयर बाज़ार फँसा रहेगा — निवेशकों में डर रहेगा — और इंडस्ट्रीज को भी चोट पहुँचेगी।

आगे क्या?

अभी सबकी नज़रें 1 अगस्त पर हैं — ट्रंप ने उसी दिन से नए टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है। अब देखते हैं वो लगाते हैं या फिर से कोई नया दाँव खेलते हैं। कुछ जानकार कहते हैं कि ट्रंप का ये सिर्फ ‘दबाव बनाने वाला खेल’ है — काम निकलवाने के लिए।

पर एक बात तो तय है — जब तक ये ड्रामा चलेगा, बाज़ार अटका रहेगा, अनिश्चितता बनी रहेगी और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

तो दोस्तों, ये था पूरा माजरा! उम्मीद है अब आपको समझ आ गया होगा कि कैसे ट्रंप का टैरिफ़ गेम सिर्फ़ अमेरिका ही नहीं, आपकी जेब तक असर डाल सकता है। अगर आपको ये जानकारी काम की लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर कीजिए — और हाँ, अपना ख्याल रखिए! 🌍✨

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