GST में होने वाला है बड़ा बदलाव! PMO ने दी हरी झंडी — आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
तो दोस्तो, बड़ी खबर आ गई है सीधे PMO से! अब PMO क्या होता है, ये तो सब जानते ही हैं — प्रधानमंत्री कार्यालय। मतलब कोई भी बड़ा फैसला लेना हो, आख़िरी मोहर वहीं से लगती है। कोई भी बड़ा काम शुरू करने से पहले सरकार की ‘हरी झंडी’ ज़रूरी होती है।
अब काफी वक्त से एक बात घूम रही थी — लेकिन बस बातों में ही अटकी पड़ी थी। सबको इंतज़ार था कि कब सरकार कहेगी, चलो भाई, कर दो! और अब वही हो गया है — PMO ने आखिरकार उस पर हरी झंडी लगा दी है।
अब सवाल ये कि आखिर किस चीज़ की बात हो रही है? दोस्तो, मुद्दा है GST में बदलाव का! जी हां, वही GST जिसके बदलाव की खबरें काफी टाइम से आती-जाती रहीं, लेकिन कुछ ठोस होता नहीं दिखा। अब सरकार ने साफ-साफ संकेत दे दिया है कि GST में बड़ा बदलाव पक्का होने वाला है।
अभी-अभी खबर आई है — “GST में बड़ा बदलाव जल्द: PMO ने दी मंजूरी” यानी जिस चीज़ की रिपोर्टें हम महीनों से सुनते आ रहे थे, वो अब हकीकत बनती दिख रही है।
तो अब क्या होगा? चलो, थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं। दो बड़ी बातें निकलकर सामने आ रही हैं, जो सीधा आपकी और मेरी जेब पर असर डालेंगी।
सबसे पहले — GST होता क्या है, ये तो सबको पता ही होगा। ये Indirect Tax है, यानी हम जब भी कुछ खरीदते हैं — चाहे वो एक चॉकलेट हो या फिर गाड़ी — GST देना ही देना है। आप 10 रुपए की भी कोई चीज़ लो तो भी उसके दाम में थोड़ा GST छुपा ही रहता है। इसी वजह से इसे Indirect Tax कहते हैं — आपको सीधा पता भी नहीं चलता!
अब पहली बड़ी बात —
1. GST Rate Rationalisation — अब 4 स्लैब नहीं, सिर्फ 3 ही!
सबसे ज्यादा चर्चा इसी की है — GST के रेट स्लैब घटाने की। अभी देखो, GST में चार दरें चल रही हैं — 5%, 12%, 18% और 28%। मतलब चीज़ें इन्हीं में बंटी रहती हैं।
अब सरकार चाहती है कि इन्हें चार से घटाकर तीन कर दिया जाए। ये मुद्दा तो कब से लटका हुआ था, लेकिन अब PMO ने कह दिया है कि ठीक है भाई, कर लो! मतलब अब इसमें बदलाव होने के पूरे चांस हैं।
अब सवाल ये कि किस स्लैब को हटाया जाएगा?
- 5% तो बेसिक चीज़ों के लिए है, उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा।
- 28% लग्ज़री आइटम और गाड़ियों पर लगता है, वो भी जस का तस रहेगा।
- असली झगड़ा 12% और 18% के बीच है।
सरकार चाहती है कि या तो 12% हटा दें, या 18% — या फिर दोनों को मिलाकर एक नया स्लैब बना दें।
अभी तीन ऑप्शन घूम रहे हैं —
1️⃣ 12% हटे और 5%, 18%, 28% रह जाएं।
2️⃣ 18% हटे और 5%, 12%, 28% रह जाएं।
3️⃣ दोनों को मिलाकर बीच में 15% का नया स्लैब लाया जाए — यानी 5%, 15% और 28%।
पहले भी सुनने में आया था कि State Panel 12% और 18% को जोड़कर एक मिडिल स्लैब बनाने का प्लान बना रहा है — ताकि झंझट कम हो और सिस्टम थोड़ा आसान हो जाए।
तो सबसे ज़्यादा पॉसिबिलिटी किसकी है? रिपोर्ट्स कह रही हैं कि 12% स्लैब हट सकता है। अगर ऐसा होता है, तो उस स्लैब में आने वाले प्रोडक्ट्स को या तो 5% में शिफ्ट करेंगे — जिससे वो सस्ते होंगे — या फिर 18% में डाल देंगे, जिससे वो महंगे हो जाएंगे।
अब किसका दाम घटेगा और किसका बढ़ेगा — ये तो वही लोग तय करेंगे। पर ये तो पक्का है कि आपकी जेब पर असर पड़ेगा!
12% में क्या-क्या आता है?
बहुत सारी चीज़ें — जैसे मक्खन, घी, पनीर, नट्स, ड्राई फ्रूट्स, पैक्ड नारियल पानी, डायबिटिक फूड, 20 लीटर पानी की बोतल, बादाम, कंप्यूटर, मोबाइल, हज़ार रुपए से सस्ते जूते-चप्पल, छाता, फ्रूट जूस और ट्रैक्टर तक!
अब देखो, अगर ट्रैक्टर जैसी चीज़ को 18% में डाल दिया तो बवाल हो जाएगा — खेती-किसानी से जुड़ा है, इसलिए उम्मीद है कि इसे शायद 5% में डाल देंगे। बाकी चीज़ों का क्या होगा — ये आने वाली GST काउंसिल की मीटिंग में साफ होगा।
वैसे GOM (Group of Ministers) भी इस प्लान को सपोर्ट कर रहा है। GOM ही आख़िरी में GST काउंसिल के पास प्रपोजल भेजता है — और आख़िरी मुहर निर्मला सीतारमण जी और उनकी टीम ही लगाएगी।
2. Compensation Cess — क्या ये भी बदल सकता है?
अब दूसरी बड़ी बात — Compensation Cess। पहले बताया गया था कि ये 31 मार्च 2026 के बाद खत्म होगा। लेकिन अब खबरें हैं कि शायद इसे थोड़ा और बढ़ाया जाए — या फिर इसकी जगह कोई नया Health & Clean Energy Cess आ जाए।
ये सेस उन प्रोडक्ट्स पर लगता है जिन पर 28% GST लगता है — जैसे सिगरेट, महंगी गाड़ियाँ, कोल्ड ड्रिंक वगैरह। अब अगर इसमें भी बदलाव होता है, तो इन चीज़ों के दाम और ऊपर जा सकते हैं। मतलब जो पहले से महंगे हैं, वो और महंगे!
तो अब आगे क्या?
अब सबकी निगाहें अगली GST काउंसिल की मीटिंग पर टिकी हैं — जहाँ ये तय होगा कि स्लैब कम होंगे या नहीं, कौन सा रेट हटेगा और Compensation Cess पर क्या नई चाल चलेगी।
PMO ने जो हरी झंडी दी है, उसके बाद अब ये खेल रुकेगा नहीं। अब देखना ये है कि सरकार कब और कैसे इसे लागू करती है — और आपके-हमारे खर्चे पर इसका क्या असर पड़ता है।
तो अगली बार जब आप चॉकलेट या जूते खरीदने जाएं — तो याद रखिएगा कि उस पर GST कितना लग रहा है — क्योंकि बहुत जल्दी उसमें कुछ न कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है!
